*30,लोक सभा सीतापुर*
कौन रोकेगा सांसद राजेश वर्मा का विजय रथ 2024लोक सभा की लगने लगी सियासी गणित सांसद राजेश वर्मा अव्वल


∆भाजपा को भीतर घातियों से रहना होगा सतर्क जो बिगाड़ सकते हैं चुनावी समीकरण
∆भाजपा की नीतियों सीतापुर सांसद राजेश वर्मा के जनहित के कार्य के विरोधी खेमे की सियासत फीकी
∆कांग्रेश गठबंधन,बसपा के पत्ते खुलना बाकी कौन होगा 30लोकसभा सीतापुर से प्रत्याशी, फिलहाल वर्तमान सांसद राजेश वर्मा की विजय अटल
∆भाजपा में महेंद्र सिंह यादव पूर्व विधायक के अंदर-अंदर प्रचार की चर्चाएं
*कांग्रेस,बसपा लड़ रही वजूद की जंग,सपा के वोटबैंक के सहारे होगा कांग्रेस गठबंधन इंडी प्रत्याशी,सीतापुर लोक सभा से प्रमोद वर्मा,पूर्व सदर विधायक राकेश राठौर को कांग्रेस गठबंधन से टिकट के लगाए जा रहे कयास,तो सांसद राजेश वर्मा हर तरफ से नंबर एक*
पवन कुमार सिंह
सीतापुर। 30 लोकसभा सीतापुर की बात की जाए तो 25वर्ष पहले से ही इसका आकलन हो जाता है कि इन बीते वर्षों में काफी समीकरण बदले और कई दिग्गज नेताओं 30 लोकसभा क्षेत्र जनपद सीतापुर का प्रतिनिधित्व किया और राजनीतिक सत्ता का स्वाद चखा।तो कई धराशाई हो गए और गुमनामी के अंधेरे में डूब गए।राजनीतिक जानकारों और विश्लेषकों से इस बारे में चर्चा की गई, तो यह पता चलता है कि कांग्रेस 1990 के बाद सीतापुर लोकसभा से बिल्कुल सूर्यास्त हो गया,कांग्रेस नेता गुमनामी के अंधेरे में कहीं गुम हो गए। जब 1995 का दौर आते आते भारतीय जनता पार्टी ने आम जनमानस के हृदय में उतर कर स्वर्गीय पंडित जनार्दन मिश्रा के रास्ते सीतापुर लोकसभा में प्रवेश किया।हालांकि इसके बाद परिवर्तन शुरू हो गया, परिवर्तन की लहर कुछ इस तरह चली की 1999 के बाद से भारतीय जनता पार्टी भी गर्त में चली गई। बहुजन समाज पार्टी का उदय हुआ और सीतापुर लोकसभा पर बसपा के हाथी का कब्जा हुआ।दो बार सीतापुर लोकसभा के रास्ते बसपा से राजेश वर्मा सांसद चुने गए। इसके बाद 2009 में बसपा सुप्रीमो ने लोकसभा चुनाव में धौरहरा से सांसद राजेश वर्मा को टिकट दिया।सीतापुर लोकसभा से कैसर जहां को बसपा ने प्रत्याशी बनाया और जीत मिली और लोकसभा में एंट्री मारी।धौरहरा में कांग्रेस नेता रहे बाद में भाजपा की ओर रूख किया वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में पीडब्ल्यूडी कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद के सामने राजेश वर्मा को हार का सामना करना पड़ा। 2014 की बात की जाए तो फिर से भारतीय जनता पार्टी का उदय हुआ परंतु इस बार पार्टी में पुराने दिग्गज नेताओं पर भरोसा न करके बसपा से भाजपा में आए सांसद राजेश वर्मा पर भरोसा जताया और सांसद राजेश वर्मा ने इस भरोसे को बखूबी कायम रखते हुए सीतापुर लोकसभा में कमल खिलाया,जिसका मुख्य कारण यह भी माना जा रहा है की जनता में उनकी पैठ और व्यवहार कुशलता, जनमानस के प्रति किए गए जनहित में विकास कार्य के चलते उनकी जनमानस में बेहतर पकड़ कहीं जा रही है।भारतीय जनता पार्टी ने 2019 लोकसभा चुनाव में भी सीतापुर से सांसद राजेश वर्मा पुनः अपना बनाकर भरोसा जताया और सीतापुर लोकसभा से प्रत्याशी बनाया और इस बार भी सभी को पछाड़ते हुए भारी वोट से जीत दर्ज।अब एक बार फिर पंचवर्षीय योजना पूरी होने वाली है और 2024 की चुनावी जंग छिड़ चुकी है,तो वही भाजपा की कल्याणकारी नीतियों के आगे बसपा और कांग्रेस गठबंधन धराशाई होते हुए नजर आ रहे हैं। संवाददाता ने अपने सहयोगी संवाददाता रवीन्द्र सिंह के साथ 30 लोकसभा क्षेत्र के कई विधानसभाओं में जाकर ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा किया,जिसमें कई जगहों पर चौपाल और नुक्कड़ पर जाकर किसानों,मजदूरों, व्यवसाईयों से मुलाकात में पता चला कि सपा के आसार थे और कांग्रेस हांसिए पर है परंतु गठबंधन में कांग्रेस प्रत्याशी के खाते में सीट जाने से सपा वोटों में कहीं न कहीं खलभली है सीतापुर से सांसद और प्रत्याशी राजेश वर्मा की जीत पक्की मानी रही है जिससे भाजपा प्रत्याशी की ओर सपा वोट भी आकर्षित होता दिख रहा है और बहुजन समाज पार्टी अपने वजूद की जंग में लगे हुए हैं और जानधार के नाम पर इनके खाते में कुछ भी नहीं है बल्कि प्रत्याशी की शायद खोज की जा रही है बसपा ने सीतापुर से अभी कौन होगा प्रत्याशी पत्ते नहीं खोले हैं बसपा के लिए कौन जीत दिलाएगा और सीतापुर के रास्ते दिल्ली तक ले जाएगा यह मंथन चल रहा है ।2014 के बाद की बात की जाए तो तेजी से समीकरण बदलते हुए नजर आ रहे हैं,जिसमें अयोध्या में राम मंदिर स्थापना,काशी विश्वनाथ वाराणसी घाट, ज्ञानवापी ने जहां हिंदुत्व को भाजपा की ओर आकर्षित किया,तो वहीं डिजिटलाइजेशन,बिजली सड़कें हर घर जल योजना,घर-घर इज्जत घर आदि मूलभूत सुविधाओं ने आम लोगों प्रभावित किया है।बसपा के अस्तित्व के समापन से अनुसूचित और पिछड़ी जातियों में बिखराव देखा जा रहा है इन जातियों का रूझान भारतीय जनता पार्टी की ओर देखने को मिल रहा है,पिछड़ी जातियों का समाजवादी पार्टी से मोह भंग हो चुका है तो कांग्रेस तो पहले से ही वोटबैंक के नाम पर सिफर पर नजर आ रही है तो भाजपा वर्तमान सांसद राजेश वर्मा के चयन से केंद्र और राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं से सबसे आगे है।समाजवादी पार्टी से सीतापुर लोकसभा टिकट की आस में पूर्व विधायक हर गोविंद भार्गव,प्रमोद वर्मा भी कतार में थे तो वहीं कांग्रेस सपा गठबंधन ने सपा नेताओं की आस पर पानी फेर दिया और गठबंधन के चलते 30लोकसभा सीतापुर सीट कांग्रेस गठबंधन में चली गई,तो भाजपा से सदर विधानसभा सीट के टिकट के लिए सपा में गए पूर्व विधायक राकेश राठौर सदर विधानसभा से सपा से टिकट न मिलने पर कांग्रेस का दामन थामा तो वहीं कई पार्टियों में रहेज्ञटिकट न मिलने के चलते एक बार फिर कांग्रेसी बने मास्टर प्रमोद वर्मा भी कांग्रेस गठबंधन से टिकट खोज रहे हैं। फिलहाल कांग्रेस गठबंधन से पूर्व सदर विधायक राकेश राठौर,मास्टर प्रमोद वर्मा प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।सीतापुर लोकसभा से टिकट मिलता है तो भीतर घातियों से भी सावधान रहना होगा,पूर्व में विधायक बिसवां रह चुके महेंद्र सिंह यादव अब भी 30लोकसभा से टिकट की आस में हैं बातें हो रही हैं कि जन सम्पर्क भी कर रहे हैं जबकि वर्तमान सांसद राजेश वर्मा को भाजपा पार्टी से मामला बन हो चुका है कहीं न कहीं भाजपा शीर्ष नेतृत्व को भी यह आभास है की वर्तमान सांसद विकास पुरुष राजेश वर्मा ही सीतापुर से जीत दिला सकते हैं।परंतु जानकारों की माने तो पूर्व विधायक महेंद्र सिंह यादव जातिगत वोट का समीकरण बिगाड़ सकते हैं परंतु जन मानस में इस विषय पर चर्चा नुक्कड़ सभाओं में की गई तो पता चला की सांसद राजेश वर्मा भाजपा के नंबर वन हैं,यह ही भाजपा का विजय रथ सीतापुर के रास्ते 2024में दिल्ली ले जाएंगे।अब बात की जाए जातिय समीकरण की तो कुर्मी बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है पिछड़ी में ही मौर्य,कश्यप आदि अन्य हैं,तो सामान्य वोटरों ब्रम्हाण क्षत्रिय का भी काफी हद तक दखल माना जाता है अनुसूचित जातियों में विभाजन की संकेत मिले हैं,जिसमें धनगड़,पासी आदि अनुसूचित जातियां शामिल हैं,बसपा छोड़ भाजपा में अनुसूचित जातियां इसलिए भी जुड़ रही हैं की फ्री राशन,गैस सिलेंडर जैसी सुविधाओं से निचला तबका अधिक लाभान्वित हुआ है,यही मुख्य कारण है की अनुसूचित जातियां भाजपा की नीतियों की वजह से साथ खड़ी दिख रही है।अब बात की जाए सीतापुर लोकसभा क्षेत्र में आने वाली विधानसभाओं की तो सेऊता, बिसवां,लहरपुर व सीतापुर आदि विधान सभाओं के हिस्से सीतापुर लोकसभा के अंतर्गत आते हैं जिसमें सिर्फ लहरपुर विधानसभा पर ही समाजवादी पार्टी का कब्जा है। सीतापुर की अन्य विधान सभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कमल खिला,जो अपने आप में भारतीय जनता पार्टी गौरवगाथा बयां कर रही है।लहरपुर विधानसभा की बात की जाए तो जनमानस को जब टटोला गया तो उन्होंने बताया कि सांसद राजेश वर्मा द्वारा क्षेत्र का काफी विकास कराया गया और इस बार फिर से राजेश वर्मा को सांसद बनाया जाएगा। सीतापुर लोक सभा में गांजरी क्षेत्र की बात की जाए तो भ्रमण के दौरान बातचीत की गई तो सभी ने सांसद राजेश वर्मा को विकास पुरुष की संज्ञा दी और कहा की गांजर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है चाहे वह पक्की सड़कें हों या स्वास्थ्य सुविधाएं सभी मूलभूत सुविधाओं पर सांसद राजेश वर्मा ने ध्यान दिया है। जिससे साफ जाहिर होता है की सीतापुर 30 लोकसभा क्षेत्र में सांसद राजेश वर्मा का पलड़ा भारी है और जनता से बातचीत में उनको अव्वल नंबर मिला है ।अब देखना यह होगा कि सीतापुर लोकसभा क्षेत्र में 2024 में कौन बाजी मारेगा फिलहाल यह तो समय के गर्भ में है।परंतु जनता की पहली पसंद सांसद राजेश वर्मा माने जा रहे हैं।

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